मंदिर निर्माण एवं अयोध्या विकास-इस प्रकार पूज्य माताजी की प्रेरणा से अब अयोध्या विकास का एक नया क्रम चालू हुआ। 13 से 24 फरवरी 1994 तक भगवान ऋषभदेव महामस्तकाभिषेक महोत्सव का राष्ट्रीय स्तरीय आयोजन भारी धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ। पुनः रायगंज स्थित प्रांगण में ही 19 से 23 फरवरी 1994 में तीन चौबीसी जिनमंदिर का निर्माण कर 72 प्रतिमाओं की पंचकल्याणक एवं 15 से 20 फरवरी 1995 में समवसरण जिनमंदिर का निर्माण होकर भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न हुए। 20 फरवरी 1995 को दोनों जिनमंदिरों के शिखर पर कलशारोहण का कार्यक्रम भी सानंद किया गया।
इसी दौरान सभी भगवन्तों की प्राचीन जन्मस्थली टोंकों पर एवं शासन-प्रशासन के द्वारा विभिन्न शासकीय स्थानों पर भी अनेक जीर्णोद्धार व निर्माण के कार्य सम्पन्न हुए, जिससे जैनधर्म की अद्भुत प्रभावना हुई और समूचे अयोध्या के साथ ही उत्तरप्रदेश व देश में इस बात का संदेश जन-जन तक पहुँचा कि अयोध्या जैन तीर्थंकरों की एवं भगवान ऋषभदेव की भी जन्मभूमि है, जो युगादि तीर्थ के रूप में सर्वमान्य है। साथ ही भगवान ऋषभदेव की इक्ष्वाकुवंशीय परम्परा में ही श्रीरामचंद्र भगवान हुए हैं, इस बात का भी प्रचार-प्रसार सभी दूर हुआ।
पुनः अयोध्या आगमन-पूज्य माताजी का सन् 1995 के उपरांत पुनः 2005 में अयोध्या आगमन हुआ और भव्यता के साथ भगवान ऋषभदेव महामस्तकाभिषेक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूज्य माताजी ने कमेटी को प्रेरणा दी कि पाँचों जन्मभूमि टोंकों पर प्राचीन चरणों और शिलालेखों से छेड़-छाड़ किए बिना ही सभी टोकों पर सुंदर जिनमंदिरों के निर्माण किये जाना चाहिए। इसके उपरांत सभी टोकों पर क्रमशः विभिन्न वर्षों में सुन्दर जिनमंदिरों के निर्माण और प्रतिमाओं की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा भी सानंद सम्पन्न हुई। पुनः पूज्य माताजी का मंगल आगमन अयोध्या में सन् 2019 में हुआ और दिनाँक 10 से 29 मार्च 2019 तक भगवान ऋषभदेव महामस्तकाभिषेक महोत्सव सम्पन्न किया गया। पुनः टिकैतनगर चातुर्मास के उपरांत पूज्य माताजी का आगमन अयोध्या में दिनाँक 4 नवम्बर 2019 को हुआ और इस अवसर पर दिनाँक 6 नवम्बर 2019 को पूज्य माताजी के सान्निध्य में यहाँ भगवान ऋषभदेव के मोक्षप्राप्त 101 पुत्रों का जिनमंदिर बनाने का शिलान्यास हुआ। साथ ही तीर्थ पर 31 फुट उत्तुंग भगवान भरत स्वामी की खड्गासन प्रतिमा विराजमान करने हेतु भी मंदिर का शिलान्यास किया गया।
पुनः पूज्य माताजी का मंगल आगमन इस अयोध्या तीर्थ पर 31 दिसम्बर 2022 को हुआ। 90 वर्ष की आयु में केवल इस शाश्वत अयोध्या तीर्थक्षेत्र की वंदना और इसके विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार व विकास का लक्ष्य लेकर दिनाँक 1 नवम्बर 2022 को पूज्य माताजी ने जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ से 650 किमी. के लिए पदविहार यात्रा करके अयोध्या आगमन किया। जिसके उपरांत यहाँ स्थित बड़ी मूर्ति-जैन मंदिर परिसर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुसज्जित करके तीस चौबीसी की 720 जिनप्रतिमाओं का एवं 31 फुट उत्तुंग भगवान भरत प्रतिमा का ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव वैशाख शु. दशमी से पूर्णिमा अर्थात् दिनाँक 30 अप्रैल से 5 मई 2023 को सम्पन्न हुआ। पश्चात् 7 मई 2023 तक महामस्तकाभिषेक हुआ।
इसके उपरांत पुनः द्वितीय चरण में फाल्गुन शु. तृतीया से सप्तमी, 2 मार्च से 6 मार्च 2025 में इस तीर्थ पर नवनिर्मित तीनलोक रचना के 727 भगवान एवं अन्य 1008 जिनप्रतिमाओं का राष्ट्रीय स्तरीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न हुआ। इस प्रकार आज यह शाश्वत तीर्थ, भगवान ऋषभदेव आदि पाँच तीर्थंकरों की जन्मभूमि अयोध्या, पूज्य माताजी की प्रेरणा-साधना एवं महती दूरदर्शिता से विश्व के क्षितिज पर लगातार अपनी आभा बिखेर रहा है और जैनत्व के अति प्राचीन इतिहास और इसकी अनादिनिधनता का एक
लौहस्तंभ-स्वर्णिम स्मारक बनकर हजारों सदियों के लिए चिरस्थायी बना हुआ है।