श्री दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी, अयोध्या
दर्शन/बुकिंग सहायता: +91-8005191351
अयोध्या जैन तीर्थ लोगो

श्री ऋषभदेव भगवान जन्मभूमि टोंक

यह पावन तीर्थ स्थल श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, पूजा और साधना का केंद्र है।

अयोध्या जैन तीर्थ मुख्य जिनालय

आध्यात्मिक अनुभव और यात्रा मार्गदर्शन

प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जन्मस्थली के रूप में एक टोंक ला. केसरी सिंह के समय से पूर्व ही विद्यमान थी और उन्होंने 1824 ई. में इसका जीर्णोद्धार कराया था, पुनः 1899 ई. में लखनऊ के पंचों ने तथा 1956 ई. में ला. जम्बू प्रसाद जैन, गोटे वाले-लखनऊ ने जीर्णोद्धार कराया टोंक स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित है।

इस प्रकार सन् 2011 में भी अयोध्या नगरी में एक बार पुनः विकास का बिगुल बजा था, जब स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की प्राचीन जन्मस्थली टोंक का ऐतिहासिक विकास सम्पन्न हुआ था। यहाँ अत्यन्त छोटी जगह होने के उपरांत भी विशाल जिनमंदिर का निर्माण बड़े चमत्कारिक ढंग से सम्पन्न हुआ और पहली मंजिल पर भगवान की सुन्दर वेदीका निर्मित करके सवा 4 फुट ऊँची भगवान ऋषभदेव की श्वेत पाषाण वाली पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई। इस प्रथम टोंक का जीर्णोद्धार एवं विकास श्री कैलाशचंद जैन सर्राफ (टिकैतनगर वाले), लखनऊ परिवार द्वारा सम्पन्न कराया गया और माघ शु. 11 से फाल्गुन कृ. 3 अर्थात् दिनाँक 14 से 20 फरवरी 2011 तक इस जिनमंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न की गई, जिसका सीधा प्रसारण पारस चैनल के माध्यम से पूरे देश-विदेश में प्रसारित हुआ था।

"अयोध्या में स्वर्गद्वार स्थित भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि टोंक पर भव्य जिनमंदिर का निर्माण एवं सवा 5 फुट ऊँची भगवान ऋषभदेव की पद्मासन प्रतिमा की भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा माघ शु. 11 से फाल्गुन कृ. 3, दिनाँक 14 से 20 फरवरी 2011 में सानंद सम्पन्न हुई। इसी के साथ यहाँ स्थित परम्परागत चतुर्थकालीन प्राचीन चरणस्थान पर भी सुंदर छतरी बनाकर जीर्णोद्धार किया गया।"

ऋषभदेव भगवान के बारे में अधिक जानकारी

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दर्शन समय

  • सुबह: 5:30 AM से 12:00 PM
  • शाम: 4:00 PM से 7:30 PM
  • विशेष आरती: सूचना अनुसार

पूजन समय

  • मुख्य पूजन: 8:00 AM से 11:30 AM
  • सामूहिक पूजन: पर्वकाल में
  • विशेष पूजन: अग्रिम अनुमति

How To Reach | कैसे पहुंचे

अयोध्या पहुंचने के लिए आप सड़क , रेल और वायु मार्ग से आ सकते है। अयोध्या में गंतव्य से मुख्य स्थान की दूरी निम्न प्रकार से है -

  • महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एअरपोर्ट अयोध्या धामपुर (10 KM )
  • अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन (1 KM )
  • अयोध्या केंट रेलवे स्टेशन (8 KM )
  • अयोध्या धाम राजकीय बस स्टेशन (8.5 KM )

यात्री सुविधा के अनुरूप यहाँ पहुंच कर भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र रायगंज, बड़ी मूर्ति मंदिर पहुंच सकते है , यहाँ से अन्य जन्मभूमि के दर्शन की व्यवस्था की जा सकती है

History | इतिहास

वीर निर्वाण के लगभग सौ वर्ष बाद मगध नरेश नंदिवर्धन ने अयोध्या में मणिपर्वत नामक उत्तुंग जैन स्तूप बनवाया था, जो आज मणि पर्वत टीला के नाम से प्रसिद्ध है। मौर्य सम्राट संप्रति और वीर विक्रमादित्य ने इस क्षेत्र के पुराने जिनमंदिरों का जीर्णोद्धार एवं नवीन मंदिरों का निर्माण कराया था। गुजरात नरेश कुमारपाल चौलुक्य (सोलंकी) ने भी यहाँ जिनमंदिर बनवाये थे। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जन्मस्थली के रूप में एक टोंक ला. केसरी सिंह के समय से पूर्व ही विद्यमान थी और उन्होंने 1824 ई. में इसका जीर्णोद्धार कराया था, पुनः 1899 ई. में लखनऊ के पंचों ने तथा 1956 ई. में ला. जम्बू प्रसाद जैन, गोटे वाले-लखनऊ ने जीर्णोद्धार कराया था। यह टोंक स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित है।

इस प्रकार सन् 2011 में भी अयोध्या नगरी में एक बार पुनः विकास का बिगुल बजा था, जब स्वर्गद्वार मोहल्ले में स्थित प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की प्राचीन जन्मस्थली टोंक का ऐतिहासिक विकास सम्पन्न हुआ था। यहाँ अत्यन्त छोटी जगह होने के उपरांत भी विशाल जिनमंदिर का निर्माण बड़े चमत्कारिक ढंग से सम्पन्न हुआ और पहली मंजिल पर भगवान की सुन्दर वेदीका निर्मित करके सवा 4 फुट ऊँची भगवान ऋषभदेव की श्वेत पाषाण वाली पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई। इस प्रथम टोंक का जीर्णोद्धार एवं विकास श्री कैलाशचंद जैन सर्राफ (टिकैतनगर वाले), लखनऊ परिवार द्वारा सम्पन्न कराया गया और माघ शु. 11 से फाल्गुन कृ. 3 अर्थात् दिनाँक 14 से 20 फरवरी 2011 तक इस जिनमंदिर की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न की गई, जिसका सीधा प्रसारण पारस चैनल के माध्यम से पूरे देश-विदेश में प्रसारित हुआ था।

How I Support | सहयोग कैसे करें

  • तीर्थ विकास कोष में दान
  • भोजनशाला सेवा सहयोग
  • स्वयंसेवक सहभागिता
प्रवेश
जिनालय
सुविधा

Map | नक्शा