श्री दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी, अयोध्या
दर्शन/बुकिंग सहायता: +91-8005191351
अयोध्या जैन तीर्थ लोगो

श्री अनन्तनाथ भगवान जन्मभूमि टोंक

यह पावन तीर्थ स्थल श्रद्धालुओं के लिए दर्शन, पूजा और साधना का केंद्र है।

अयोध्या जैन तीर्थ मुख्य जिनालय

आध्यात्मिक अनुभव और यात्रा मार्गदर्शन

"अयोध्या में राजघाट स्थित भगवान अनंतनाथ जन्मभूमि टोंक पर भव्य जिनमंदिर का निर्माण एवं 12.5 फुट ऊँची भगवान अनन्तनाथ की पद्मासन प्रतिमा की भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा तिथि आषाढ़ कृ. त्रयोदशी से आषाढ़ शु. द्वितीया, दिनाँक 5 से 10 जुलाई 2013 में सानंद सम्पन्न हुई। इसी के साथ यहाँ स्थित प्राचीन चरणस्थान पर भी सुंदर छतरी बनाकर जीर्णोद्धार किया गया।"

यह जिनमंदिर अंदर से अतिसुन्दर सुसज्जित किया गया है और इसकी सुन्दर वेदी पर लाल पाषाण में भगवान अनंतनाथ की 10 फुट ऊँची पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई है। इस मंदिर जी का आषाढ़ कृ. त्रयोदशी से आषाढ़ शु. द्वितीया अर्थात् 5 जुलाई से 10 जुलाई 2013 में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न किया गया, जिसमें सम्पूर्ण जिनमंदिर के निर्माण से लेकर प्रतिमा स्थापना व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का पुण्य श्री प्रद्युम्न कुमार जैन छोटी सा. परिवार-टिकैतनगर (उ.प्र.) ने अर्जित किया।

दर्शन समय

  • सुबह: 5:30 AM से 12:00 PM
  • शाम: 4:00 PM से 7:30 PM
  • विशेष आरती: सूचना अनुसार

पूजन समय

  • मुख्य पूजन: 8:00 AM से 11:30 AM
  • सामूहिक पूजन: पर्वकाल में
  • विशेष पूजन: अग्रिम अनुमति

How To Reach | कैसे पहुंचे

अयोध्या पहुंचने के लिए आप सड़क , रेल और वायु मार्ग से आ सकते है। अयोध्या में गंतव्य से मुख्य स्थान की दूरी निम्न प्रकार से है -

  • महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एअरपोर्ट अयोध्या धामपुर (10 KM )
  • अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन (1 KM )
  • अयोध्या केंट रेलवे स्टेशन (8 KM )
  • अयोध्या धाम राजकीय बस स्टेशन (8.5 KM )

यात्री सुविधा के अनुरूप यहाँ पहुंच कर भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र रायगंज, बड़ी मूर्ति मंदिर पहुंच सकते है , यहाँ से अन्य जन्मभूमि के दर्शन की व्यवस्था की जा सकती है

History | इतिहास

अयोध्या नगरी में सरयू नदी के पास राजघाट पर भगवान अनतनाथ के चरण चिन्ह सहित मंदिर है। इसका जीर्णोद्धार 1724 ई. में व 1899 ई. में कराया गया था। इस टोक से लगे हुए टीले की पुरातत्व विभाग ने खुदाई कराई थी और अब से लगभग 100 वर्ष पूर्व जनरल कनिंघम ने उस टीले का वर्णन "जैन टीला" नाम से किया था। कुछ वर्ष पूर्व सरयू नदी की बाढ़ से इस टोंक को क्षति पहुँचने पर तीर्थक्षेत्र कमेटी ने जीर्णोद्धार कराया था। पुनः इस टोंक की भी अविकसित स्थिति को देखकर पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी को प्रेरणा दी और सन् 2013 में यहाँ विशाल जिनमंदिर का निर्माण किया गया।

How I Support | सहयोग कैसे करें

  • तीर्थ विकास कोष में दान
  • भोजनशाला सेवा सहयोग
  • स्वयंसेवक सहभागिता
प्रवेश
जिनालय
सुविधा

Map | नक्शा