आध्यात्मिक अनुभव और यात्रा मार्गदर्शन
"अयोध्या में मातगढ़ स्थित भगवान अजितनाथ जन्मभूमि टोंक पर भव्य जिनमंदिर का निर्माण एवं सवा 5 फुट ऊँची भगवान अजितनाथ की पद्मासन प्रतिमा की भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा ज्येष्ठ शुक्ला एकम् से पंचमी, दिनाँक 29 मई से 2 जून 2014 में सम्पन्न हुई। इसी के साथ यहाँ स्थित परम्परागत चतुर्थकालीन प्राचीन चरण स्थान का भी सुंदर जीर्णोद्धार किया गया।"
भगवान अजितनाथ जन्मभूमि टोंक पर मन्दिर निर्माण, जीर्णोध्दार एवं पंचकल्याणक प्रतिष्ठा
जैनधर्म के द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का जन्म करोड़ों-करोड़ों वर्ष पूर्व इस अयोध्या नगरी में हुआ था। इसीलिए यहाँ पर भगवान के चरण शताब्दियों से विराजमान हैं जिनके दर्शन करने के लिए हजारों-लाखों जैन यात्री शताब्दियों से आकर श्रद्धापूर्वक वंदना कर पुण्य अर्जित कर रहे हैं। वर्तमान में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज की शिष्या गणिनीप्रमुख आर्यिका शिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी एवंउनकी शिष्या प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी की प्रेरणा से जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के पीठाधीश कर्मयोगी स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी के मार्गदर्शन एवं सान्निध्य में इस अजितनाथ टोंक पर जिनमन्दिर का निर्माण, अत्यन्त मनोज्ञ प्रतिमा विराजमान एवं प्राचीन टोंक का जीर्णोद्धार तथा चौबीस तीर्थंकर के चरण टोंक मंदिर का निर्माण कराके ज्येष्ठ शुक्ला एकम् से ज्येष्ठ शुक्ला पंचमी वीर नि.सं. 2540 तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कराके सम्पूर्ण कार्य सम्पन्न किया गया। प्रतिष्ठाचार्य श्री विजय कुमार जैन एवं पं. प्रवीण चंद शास्त्री, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर द्वारा प्रतिष्ठा का कार्य विधिविधानपूर्वक सम्पन्न कराया गया। उपरोक्त निर्माण एवं जीर्णोद्धार के समस्त कार्य का सौभाग्य एवं पुण्य टिकैतनगर निवासी स्व. श्री बालचंद जैन एवं मातेश्वरी स्व. गुणवती जैन के सुपुत्र वर्तमान में इन्दिरानगर-लखनऊ प्रवासी श्री वीरेन्द्र कुमार जैन सर्राफ एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती तारादेवी को प्राप्त हुआ है। इस पुनीत कार्य में श्री वीरेन्द्र कुमार जैन के पुत्र एवं पुत्रवधुओं ने तन-मन-धन से सहयोग करके पुण्य व यश अर्जित किया है। इस पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में माता-पिता श्री वीरेन्द्र कुमार जैन-तारादेवी, सौधर्म इन्द्र-अभयकुमार-संजुला, धनकुबेर-अरिंजयकुमार-सुप्रिया, यज्ञनायक-अमित कुमार-आकांक्षा जैन ने सोमाग्य प्राप्त किया भगवान अजितनाथ से यही मंगल कामना है कि भगवान अजितनाथ के जन्मस्थल पर निर्मित इस मंदिर व चरणों के दर्शन कर भन्यात्मा को सम्यग्दर्शन की प्राप्ति होती रहे तथा संसार जब तक सूरज व चाँद रहें, तब तक भगवान अजितनाथ की इस प्रतिमा की वंदना करने का लाभ भव्य जीवों को प्राप्त होता रहे।