भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि अयोध्या में आपका हार्दिक अभिनंदन
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दर्शन समय
प्रातः 5:00 से दोपहर 02:00 तक
सायं 3:30 से रात्रि 9:00 तक
यात्री सहायता
धर्मशाला, भोजनशाला और सेवा डेस्क
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मुख्य सेवा संपर्क
+91-8005191351 (मुख्य कार्यालय)
+91-9411025124 (जीवन जी जैन)
+91-9717331008 (विजय जी जैन)
रायगंज बड़ी मूर्ति मंदिर, अयोध्या
अयोध्या जैन परंपरा की प्राचीनतम तीर्थभूमियों में से एक है। जैन आगम परंपरा में यह भूमि विशेष श्रद्धा और ऐतिहासिक गरिमा के साथ स्मरण की जाती है। भगवान ऋषभदेव सहित अनेक तीर्थंकरों के कल्याणक प्रसंगों से यह क्षेत्र आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीर्थ क्षेत्र समिति द्वारा दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, अनुशासन, साधु-संत वंदना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को संतुलित रूप से संचालित किया जा रहा है। तीर्थ के संरक्षण और विकास हेतु निरंतर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
अयोध्या जैन तीर्थ में श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि साधना, अध्ययन और संस्कारमय वातावरण का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
तीन लोक जिनालय
अयोध्या जैन परंपरा की प्राचीनतम तीर्थभूमियों में से एक है। जैन आगम परंपरा में यह भूमि विशेष श्रद्धा और ऐतिहासिक गरिमा के साथ स्मरण की जाती है। भगवान ऋषभदेव सहित अनेक तीर्थंकरों के कल्याणक प्रसंगों से यह क्षेत्र आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीर्थ क्षेत्र समिति द्वारा दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, अनुशासन, साधु-संत वंदना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को संतुलित रूप से संचालित किया जा रहा है। तीर्थ के संरक्षण और विकास हेतु निरंतर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
अयोध्या जैन तीर्थ में श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि साधना, अध्ययन और संस्कारमय वातावरण का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
आराध्य श्री ऋषभदेव जी के 101 पुत्र जिनालय
अयोध्या जैन परंपरा की प्राचीनतम तीर्थभूमियों में से एक है। जैन आगम परंपरा में यह भूमि विशेष श्रद्धा और ऐतिहासिक गरिमा के साथ स्मरण की जाती है। भगवान ऋषभदेव सहित अनेक तीर्थंकरों के कल्याणक प्रसंगों से यह क्षेत्र आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीर्थ क्षेत्र समिति द्वारा दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, अनुशासन, साधु-संत वंदना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को संतुलित रूप से संचालित किया जा रहा है। तीर्थ के संरक्षण और विकास हेतु निरंतर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
अयोध्या जैन तीर्थ में श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि साधना, अध्ययन और संस्कारमय वातावरण का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
चक्रवर्ती भगवान भरत जिनालय
अयोध्या जैन परंपरा की प्राचीनतम तीर्थभूमियों में से एक है। जैन आगम परंपरा में यह भूमि विशेष श्रद्धा और ऐतिहासिक गरिमा के साथ स्मरण की जाती है। भगवान ऋषभदेव सहित अनेक तीर्थंकरों के कल्याणक प्रसंगों से यह क्षेत्र आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीर्थ क्षेत्र समिति द्वारा दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, अनुशासन, साधु-संत वंदना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को संतुलित रूप से संचालित किया जा रहा है। तीर्थ के संरक्षण और विकास हेतु निरंतर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
अयोध्या जैन तीर्थ में श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि साधना, अध्ययन और संस्कारमय वातावरण का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
सर्वतोभद्र महल (निर्माणाधीन)
अयोध्या जैन परंपरा की प्राचीनतम तीर्थभूमियों में से एक है। जैन आगम परंपरा में यह भूमि विशेष श्रद्धा और ऐतिहासिक गरिमा के साथ स्मरण की जाती है। भगवान ऋषभदेव सहित अनेक तीर्थंकरों के कल्याणक प्रसंगों से यह क्षेत्र आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीर्थ क्षेत्र समिति द्वारा दर्शन व्यवस्था, स्वच्छता, अनुशासन, साधु-संत वंदना और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को संतुलित रूप से संचालित किया जा रहा है। तीर्थ के संरक्षण और विकास हेतु निरंतर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
अयोध्या जैन तीर्थ में श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि साधना, अध्ययन और संस्कारमय वातावरण का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
दैनिक पूजा एवं आरती क्रम
- मंदिर दर्शन प्रारम्भ प्रातः 5 बजे से
- अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजा-विधान
- सायंकालीन आरती, भजन, प्रवचन और प्रश्न मंच
यात्रियों के लिए निर्देश
- समूह यात्रा से पहले कार्यालय में पंजीकरण करें
- विशेष पूजा हेतु समय निर्धारण आवश्यक है
- तीर्थ परिसर में स्वच्छता और मर्यादा का पालन करें
- दान सहयोग केवल अधिकृत माध्यम से करें
प्रमुख तीर्थ टोंक
अयोध्या क्षेत्र की प्रमुख जन्मभूमि टोंकों का संक्षिप्त परिचय
श्री ऋषभदेव भगवान जन्मभूमि टोंक
अयोध्या तीर्थ की मूल आध्यात्मिक धुरी, जहां हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन हेतु पधारते हैं।
विस्तार से देखें
श्री अजितनाथ भगवान जन्मभूमि टोंक
धार्मिक अनुशासन और साधना वातावरण के लिए विशेष रूप से विख्यात तीर्थ स्थल।
विस्तार से देखें
श्री अभिनंदन भगवान जन्मभूमि टोंक
ऐतिहासिक परंपरा और भावपूर्ण जिनपूजन व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र।
विस्तार से देखें
श्री सुमतिनाथ भगवान जन्मभूमि टोंक
धार्मिक अनुशासन और साधना वातावरण के लिए विशेष रूप से विख्यात तीर्थ स्थल।
विस्तार से देखें
श्री अनन्तनाथ भगवान जन्मभूमि टोंक
ऐतिहासिक परंपरा और भावपूर्ण जिनपूजन व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र।
विस्तार से देखेंअन्य दर्शनीय स्थान
अयोध्या क्षेत्र के निकटवर्ती अन्य दर्शनीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर
श्री धर्मनाथ दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र, रतनपुरी
श्री धर्मनाथ दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र रतनपुरी ग्राम - रतनपुरी पोस्ट - रोनाही जिला - फैजाबाद (उत्तर प्रदेश), अयोध्या तीर्थ की मूल आध्यात्मिक धुरी, जहां हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन हेतु पधारते हैं।
विस्तार से देखेंभगवान ऋषभदेव राजकीय उद्यान राजघाट, अयोध्या
अयोध्या में सरयू नदी के तट पर स्थित भगवान ऋषभदेव राजकीय उद्यान (राजघाट) एक शांतिपूर्ण और हरा-भरा पार्क है, जो मुख्य रूप से प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की 21-22 फीट ऊँची प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। 1989 में स्थापित यह उद्यान आध्यात्मिक शांति और प्रकृति के संगम के साथ योग व टहलने के लिए एक प्रमुख स्थान है।
विस्तार से देखेंज्ञानमती माताजी की जन्मभूमि, टिकैतनगर
यहाँ बहुत ही प्राचीन श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर है तथा साथ ही नवग्रह जैन मंदिर भी है।