तीस चौबीसी मंदिर
तीर्थंकर को वंदते, जन्मभूमि वंदंत ।
तीर्थंकर को तीर्थ को, नमूँ मिले भव अंत ।।
इस मध्यलोक में प्रथम जम्बूद्वीप में 1 भरत, 1 ऐरावत, द्वितीय धातकीखण्ड में 2 भरत, 2 ऐरावत, तृतीय पुष्करार्धद्वीप में 2 भरत, 2 ऐरावत, ऐसे 5 भरत, 5 ऐरावत इन दश क्षेत्रों में षट्काल परिवर्तन में चतुर्थकाल में 24-24 तीर्थंकर होते रहते हैं। उन्हीं के भूत, वर्तमान व भविष्यत् संबंधी ऐसे 10×3=30 चौबीसी के ये मंत्र हैं।