भजन
तर्ज-हम जैन कुल में जन्मे हैं..
हम भरत के भारत में हैं, अभिमान करो रे,
हम वीर के शासन में है, श्रद्धान करो रे
अभिमान करो रे, श्रद्धान करो रे
हम भरत के भारत में हैं, अभिमान करो रे.......।। टेक. ।।
जहाँ आत्मा की प्रभा में रत रहते हैं मुनिगण-2
जहाँ स्वात्मा की साधना के गूंजते हैं स्वर-2
उसी धरा पे जनमें हैं हम, अभिमान करो रे-2
हम भरत के भारत में हैं, अभिमान करो रे.......(1)
जहाँ सीता आदि महासतियों ने जनम लिया-2
जहाँ गणिनी माता ज्ञानमती ने जनम लिया-2
उसी देश में रहते हैं हम, अभिमान करो रे-2
हम भरत के भारत में हैं, अभिमान करो रे.......(2)
भरतराज प्रभु की प्रतिमा जहाँ जहाँ आज हैं-2
गूँजता वहाँ से भरत सिद्धप्रभु का त्याग है-2
'चन्दनामती' उस त्याग का गुणगान करो रे-2
हम भरत के भारत में हैं, अभिमान करो रे.......(3)