भजन -
तर्ज-नगरी हो अयोध्या सी.......
इक अवध की कन्या ने, मोहिनी की मैना ने, माँ ज्ञानमती बनकर
इतिहास रचाया है।।1
है ग्राम टिकैतनगर, पितु छोटेलाल के घर, देवी सा जनम लेकर,
इतिहास बनाया है।।2।।
बीसवीं सदी की प्रथम, ये बालयोगिनी बन, ब्राह्मी गणिनी माँ सम,
शिवपथ अपनाया है।।3।।
माँ-पुत्री हों ऐसी, मोहिनी-मैना जैसी, दोनों ने दीक्षा ले,
निजवचन निभाया है।।4।।
गुरु वीरसागर जी से, आर्यिका की दीक्षा ले, माँ ज्ञानमती बनकर,
गणिनी पद पाया है। ।5।।
ये विश्व विभूती हैं, जिनशासन कीर्ति हैं, चन्दनामती जग ने,
इन्हें शीश झुकाया है। ।6।।