भजन
तर्ज-गंगा मैया में जब तक..
नीले अम्बर में जब तक सितारे रहे,
हम अयोध्या की गुणकीर्ति गाते रहें।
गाते रहें............देवा........ हो आदि देवा..।।0।।
आदि तीरथ है शाश्वत अयोध्या, है अनादि अनंत अयोध्या।
जनमभूमि है ये, कर्मभूमि है ये
आदि प्रभु राजनीति बताते रहे-बताते रहे।
देवा... हो आदि देवा....।।1।।
जीवन जीने का मारग बताया, कर्मभूमि में जीना सिखाया।
भरत बाहूबली-ब्राह्मी और सुन्दरी,
युग का इतिहास स्वर्णिम बनाते रहे
बनाते रहे... देवा.......... हो आदि देवा. ।।2।।
देशभूषण जी आचार्य गुरुवर, आए इक बार तीरथ पे मुनिवर।
उनकी दृष्टी पड़ी-बड़ी मूर्ती बनी,
भक्त भक्ती के स्वर गीत गाते रहे।
गाते रहे......देवा. ....हो आदि देवा..........||3||
गणिनी श्री ज्ञानमति माताजी ने, तीर्थ शाश्वत सजाया उन्हीं ने।
चन्दनामति कहे-आओ यात्रा करें,
जन्मभूमी की गुणगरिमा गाते रहें।
गाते रहें......देवा....... हो आदि देवा... ||4||