भजन
तर्ज-अच्छा सिला दिया..
रत्नमयी रत्नपुरी तीर्थधाम है।
धर्मनाथ जन्मभूमि तीर्थधाम है।1।।
यहाँ कभी इन्द्र और धनकुबेर आते थे।
दिव्यनगरी बना के रत्न बरसाते थे।।
मात-पिता के धन के भण्डार खुल जाते थे।
तीर्थंकर की पूजा करने इन्द्र सदा आते थे।।
जन्मभूमि माघ शुक्ला तेरस नाम है-2|
धर्मनाथ जन्मभूमि.....||1||
सती मनोवती की प्रतिज्ञा जहाँ पूर्ण हुई।
गजमोती चढ़ा के उसकी परीक्षा पूर्ण हुई।।
देवों ने मंदिर बना के दर्श करवाया था।
भारतीय सतियों का नाम बढ़ाया था।।
समझो दर्शन प्रतिज्ञा का पावन धाम है,
धर्मनाथ जन्मभूमि...........||2||
उन्निस सौ पचास सन् में घटी एक घटना।
मंदिर जी में धर्मनाथ प्रभु की वेदी बनना।।
मैना क्वांरी कन्या ने पर्दे को खोला था।
वेदी में प्रकाश देख सबने जय-जय बोला था।।
"चन्दनामती" ये ऐतिहासिक धाम है,
धर्मनाथ जन्मभूमि तीर्थधाम है।।3।।