श्रेणी: भजन
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भजन
तर्ज-अच्छा सिला दिया.......
विश्व के प्रथम राजा ऋषभदेव हैं,
वे तो सभी देवताओं के भी देव हैं-2।। विश्व के....... ।।0।।
उन्होंने ही जनता को सब कुछ सिखाया था,
राज...
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रचयित्री प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती
तर्ज-मेरी झोपड़ी के भाग्य...
अयोध्या में ऋषभदेव जी का जन्म हुआ है,
गीत गाएंगे ।।0।।
गीत गाएंगे, प्रभु के गीत गाएंगे-2।। अयोध...
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तर्ज-अरे जग जा रहे चेतन
जिओ युग युग हे माँ ज्ञानमति ! हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं।
रहो स्वस्थ चिरायू मातश्री ! हम यही भावना करते हैं ।। टेक.।।
पहले न...
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कथानक के माध्यम से -
तर्ज-तेरी दुनिया से दूर.......
आँसू बन गये वरदान, अयोध्या का हुआ नाम,
वे आँसू याद रखना-2।। टेक. ।।
सुनो भाई-बहनों ! सन् उन्निस सौ तिरानवे म...
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रचयित्री प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती
तर्ज-तन डोले......
ॐकार बोलो, फिर आँख खोलो, सब कार्य सिद्ध हो जाएँगे,
नर जन्म सफल हो जाएगा।। टेक. ।।
प्रातःकाल उषा ब...
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तर्ज-नगरी हो अयोध्या सी.......
इक अवध की कन्या ने, मोहिनी की मैना ने, माँ ज्ञानमती बनकर
इतिहास रचाया है।।1
है ग्राम टिकैतनगर, पितु छोटेलाल के घर, देवी सा जन...
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तर्ज-देख तेरे संसार की हालत..
सबसे बड़े प्रभु, सबसे बड़े गुरु, सबसे बड़ी माता,
झुकाओ त्रय पद में माथा ।। टेक. ।।
सबसे बड़े प्रभु ऋषभदेव हैं, कर्मभूमि के प्रथम देव ह...
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तर्ज-हम जैन कुल में जन्मे हैं..
हम भरत के भारत में हैं, अभिमान करो रे,
हम वीर के शासन में है, श्रद्धान करो रे
अभिमान करो रे, श्रद्धान करो रे
हम भरत के भारत में हैं, अभ...
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तर्ज-गंगा मैया में जब तक..
नीले अम्बर में जब तक सितारे रहे,
हम अयोध्या की गुणकीर्ति गाते रहें।
गाते रहें............देवा........ हो आदि देवा..।।0।।
आदि तीरथ है शाश्वत अय...
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रचयित्री प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चन्दनामती
तर्ज-प्रभु नेमि बता जाना...
प्रभु ऋषभ जहाँ जनमें, खेले जहाँ बचपन में,
मरुदेवी के आंगन में, वह नगरि अयोध्या है।।1।।
जहाँ...
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तुम से लागी लगन,ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा,मेटो मेटो जी संकट हमारा ||
निशदिन तुमको जपूँ,पर से नेह तजूँ, जीवन सारा,तेरे चरणों में बीत हमारा ||टेक||
अश्वसेन के राजदुलारे,वामा देवी के सुत प्राण प्...